Dr.satyendra singh

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satyendrasingh


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jeevan mrityu

Posted On: 4 Dec, 2010  
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Amar singh ji And his secularism

Posted On: 21 Feb, 2010  
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Indian cemented Total HIp verses Imported

Posted On: 21 Feb, 2010  
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Total Hip Replacement

Posted On: 19 Feb, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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जब हम ऊंचाई पर खड़े होकर नीचे आते जाते प्राणियों की भीड़ को देखते हैं तो कई बार माँ में ये प्रश्न उठता है इ ये कहाँ जा रहे हैं ? क्यूँ जा रहे हैं??????? इनके इतने भागने दोड़ने का उद्देश्य क्या है?? लेकिन ऊँचाई पर खड़े होकर देखते रहना ही जीवन होता तो हम इस आती जाती भीड़ में कभी शामिल नहीं होते . लेकिन अजीब बात तो ये है की हम दूर से खड़े देखते भी हैं और उस भीड़ में शामिल भी होते हैं हम अध्यात्म में भी जीते हैं और दुनियां की संगीन हकीकत से भी रूबरू होते हैं मेरे पिताश्री कहा करते थे की संगीन हकीकत है दुनियां ये एक सुनहरी ख्वाब नहीं , और मानव योनी में आने के वाद इस सत्य को राम ने भी जिया , कृष्ण , मोहम्मद , नानक ने भी , बुद्ध ने भी . जहाँ तक राम के विलाप और ज्ञान का प्रश्न है तो ये आम घटना आज भी किसी भी शमशान भूमि में जाकर ,साक्षात देखि जा सकती है . ये ही आश्चर्य है और ये ही माया है , जब माया मोह से राम , कृष्ण अछोते नहीं हैं मानव योनी में आने के बाद तो , हम लोग तो साधारण व्यक्ति हैं . मैं जो कह रहा हूँ वो ही सत्य दूसरा जो करह वो मिथ्या ये ही मोह है . सब जानते हैं की जगत मिथ्या है फिर भी जीने की कामना रखते हैं सब जानते की ये धन मिथ्या है फिर भी महाधनी होने की इच्छा से विरत नहीं हो पाते , मैं अपवादों की नहीं दुनियां के अरबों व्यक्तियों की बात कर रहा हूँ . (आप की सम्मति से मुझे नई और बडी महत्वपूर्ण बात पता चली कि पदार्थ भी अपनी स्थििति में परिवर्तन नहीं चाहता। मैं अभी तक यह समझता था कि पदार्थ जड़ है और जीवित रहने की जद्दोजहद सिर्फ चेतन का गुण है)— प्रत्येक पदार्थ गतिमान अदू पर्मदुओं और उनसे भी छोटे एलेक्ट्रोंस प्रोतोंस , नुत्रोंस से बना है जो हर समय गतिमान रहते हैं . (योग या ब्रह्म विद्या के जानने वालों ने कहा है कि मन की गति जानी जा सकती है, लेकिन मन को वश में कर के। पहले मन को साधना पड़ता है।)—अभी तक किसी ज्ञानी ने मन की अधिकारिक गति का ज्ञान नहीं दिया . [जीवन की नश्वरता को हृदयंगम कर हम मोह से बच सकते हैं।}—ये बात सच है , मैं सहमत हूँ l लेकिन जीवन नश्वर नहीं है , नश्वर तो केवल ईश्वरीय उर्जा है ,जो जीवन हम जी रहे हैं वो तो एक दिन जाएगा ही , सुख , दुःख विवाद अवसाद , रुदन क्रंदन , स्वस्थ , अस्वस्थ , ये जीवन के आवश्यक अंग हैं , हम किसी भी मरीज को ये नहीं समझा सकते की जीवन तो आना जाना है इसका मोह न करो , कष्ट जीवन के अंग हैं आत्मा तो अजर अमर है , दुःख को महसूस न करो, कई बार हम जानते हैं की ये मरीज नहीं बचेगा फिर भी घर वालों से ये नहीं कह सकते की इसका इलाज न कराओ , बड़े बड़े अध्यात्मिक लोगों को मैंने अपने च्कितासक जीवन में अंतिम पदो पर भी जीवन के कुछ क्षण और देदेने की याचना करते हुए देखा है . एक जगद गुरु को भी चोटों से कराहते हुए और जीवन की और अभिलाषा में याचना करते देखा है ये कैसी माया है जो जानने के बाद भी की सब मिथ्या है इस मिथ्या जगत को हम छोड़ना नहीं चाहते . कहना जितना आसान है , करना उतना ही कठिन . क्यूंकि ये संसार तामोगुड प्रधान है और इस श्रृष्टि की रचना भी तमोगुड से ही हुयी है , तनोगुड श्रृष्टि की रचना में प्रमुख कारन है .ऐसा शास्त्र भी कहते है और , जीवन में भी परिलक्षित होता है , तनोगुद ही माया मोह का कारन है , और ये श्रृष्टि ही तमोगुड प्रधान है , फिर मोह से अलग होना इस श्रृष्टि से अलग होने के सामान ही है, और ये तो मृत्यु के पश्चात ही हो सकता है , इस श्रृष्टि को जिसमे हम मानव और जीव सभी वास कहते हैं , नाम ही मृत्युलोक दिया गया है , तो jeevan और मृत्यु आभासी होते हुए भी सत्य ही हैं . जो दिखता है वोही सत्य , और वोही साक्ष भी माना जाता है , न्यायालय में भी . जितना जीवन सत्य है उतना ही मोह और उतनी ही मृत्यु सादर आपका डॉ. सत्येन्द्र

के द्वारा: satyendrasingh satyendrasingh

तिवारी जी ! आपकी टिप्पड़ी आपकी सजग सोच का प्रमाण है ,व्यवसाय तो हम भी करते हैं , लेकिन सेवा की तरह ,के नाम पर सेवादारों और तथाकथित सेवाकेन्द्रों को रोका नहीं गया तो गाँव देहात की गरीब जनता की जमीन जायदाद , जानवर और मकान यूँ ही बिकते रहेंगे,एक बीमार ठीक होगा लेकिन पूरे परिवार की गरीबी रुपी बममारी का इलाज कौन करेगा? इस दिशा में कोई तो कदम उठाना ही होगा , किसी को तो आगे बढ़ना ही होगा ,दैनिक जागरण परवार का आभारी हूँ की इस समाचार पत्र ने इस समस्या को कई बार बड़ी प्रमुखता से उठाया है , dig दीपक जुनेजा जी ने इस व्यवस्था पर अंकुश भी लगाया था , पर पता नहीं किन कारणों से उनके जाने के पश्चात ये दुबारा फिर शुरू हो गयी . धन्यवाद

के द्वारा:




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